अक्सर यह देखा जाता हे की आप अपने दैनिक कार्यो के चलते अपने लक्ष्यों को नजर अंदाज करती रहती हे ।और इसका कारन समय का आभाव बताती हे,समय कभी घटता या बढ़ता नही हे, बात सही तरीके से उसके समायोजन की होती हे आप एक दिन के 24 घंटो मे से ना तो एक भी मिनट घटा सकती हे और ना ही एक भी मिनट बढ़ा सकती हे,
इसलिए सारी बात समय के उचित प्रबन्धन पर ही आकर रुक जाती हे। जिन महिलाओ ने भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया हे उन सब के पास भी करने के लिए वही कार्य थे जो आपके पास हे और वे भी आपकी ही तरह हे और ये भी वही समय रखती हे जो आपके पास हे।
फर्क सिर्फ इतना हे की आप अन्य कार्यो को अपने लक्ष्यों से अधिक महत्त्व देती हे और आप जब तक आप स्वयं को महत्त्व देना नही सीखेंगी,तब तक आप अपने लिए समय नही निकाल पाएंगी।
सबसे पहले जेसे परीवार के प्रत्येक सादस्य के कार्यो के समय निश्चित करती हे वेसे ही अपने लिए भी समय निधारित करे और इसका दृढ निश्चय करें। इसके लिए आप टाइम टेबल का सहारा भी ले सकती हे,सबसे पहले किसी भी कार्य को करने के लिए समय सिमा तय करे और उस काम को उतने ही या उससे भी कम समय में करने की कोशिश करे, इससे अंतिरिक्त समय व्यय नही होगा।
तो आपको निश्चित ही अपने लिए समय मिलेगा तो आप अपने लक्ष्यों,महत्वकांक्षाओ या आपका कोई शोक ही क्यों न हो को पूरा करने का समय मिलेगा।इससे आपका मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ेगा।और जब आप घरेलु कार्यो के अतिरिक्त कुछ अन्य कार्य करेंगि तोआप की सोच सकारात्मक होगी,और व्यस्त रहेंगी तो नकारात्मकता से बचेंगी क्योकि सिमित दायरे में मानसिक विकास में बाधा आती हे ध्यान बेकार की व्यर्थ बातो में लगने से बचता हे और आपकी छवि भी खराब नही होगी।
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suchitra singh
इसलिए सारी बात समय के उचित प्रबन्धन पर ही आकर रुक जाती हे। जिन महिलाओ ने भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया हे उन सब के पास भी करने के लिए वही कार्य थे जो आपके पास हे और वे भी आपकी ही तरह हे और ये भी वही समय रखती हे जो आपके पास हे।
फर्क सिर्फ इतना हे की आप अन्य कार्यो को अपने लक्ष्यों से अधिक महत्त्व देती हे और आप जब तक आप स्वयं को महत्त्व देना नही सीखेंगी,तब तक आप अपने लिए समय नही निकाल पाएंगी।
सबसे पहले जेसे परीवार के प्रत्येक सादस्य के कार्यो के समय निश्चित करती हे वेसे ही अपने लिए भी समय निधारित करे और इसका दृढ निश्चय करें। इसके लिए आप टाइम टेबल का सहारा भी ले सकती हे,सबसे पहले किसी भी कार्य को करने के लिए समय सिमा तय करे और उस काम को उतने ही या उससे भी कम समय में करने की कोशिश करे, इससे अंतिरिक्त समय व्यय नही होगा।
तो आपको निश्चित ही अपने लिए समय मिलेगा तो आप अपने लक्ष्यों,महत्वकांक्षाओ या आपका कोई शोक ही क्यों न हो को पूरा करने का समय मिलेगा।इससे आपका मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ेगा।और जब आप घरेलु कार्यो के अतिरिक्त कुछ अन्य कार्य करेंगि तोआप की सोच सकारात्मक होगी,और व्यस्त रहेंगी तो नकारात्मकता से बचेंगी क्योकि सिमित दायरे में मानसिक विकास में बाधा आती हे ध्यान बेकार की व्यर्थ बातो में लगने से बचता हे और आपकी छवि भी खराब नही होगी।
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